रटो नही समझो hindi story with moral

  रटो नही समझो / hindi story with moral

hi दोस्तों स्वागत है आपका inhindistory.com पर आज हम आपके लिए इन नई  hindi story with moral लेकर आये हैं । जो आपको पसंद आएगी।  रटो नही समझो hindi story with moral :-
 
                                 बहुत समय एक वन के अन्दर एक

     आश्रम था । जिसमें एक महाऋषि रहते थे। वो उस शांत वातावरण में घोर तपस्या करते थे। वो बहुत दयालु प्रकृति के थे और वन के पशु पक्षियों से उनका काफी लगाव था। एक दिन वो वन में घूम रहे थे तो उनको तोते के दो बच्चे दिखाई दिए जो काफी मासूम और शरीर से दुर्बल लग रहे थे । ऋषि को उन तोतों के बच्चे पर दया आ गई । तो ऋषि उन बच्चों को अपने आश्रम ले आये । ऋषि उन दोनों तोतों का बहुत अच्छी तरह से लालन पालन करने लगे। तोते के बच्चे भी ऋषि से बहुत प्यार करते जब भी उनको भूख लगती जोर जोर से चिल्लाते और ऋषि को आते देख प्रणाम बोलते । ऋषि भी यह देख बहुत खुश होते।

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जब तोते बड़े हो गए तो वो उड़कर वन में भी जाने लगे। वो जब तक वन से लौट कर आश्रम न आ जाते जब तक ऋषि को उनकी काफी चिंता रहती । जब तक उनका पूजा पाठ में बिलकुल भी मन नही लगता। उनको चिंता रहती की तोतों को कोई शिकारी न पकड़ ले। एक दिन ऋषि के मन में विचार आया की क्यों न तोतों को सीखा दिया जाये की शिकारी उनको पकड़ने आये तो वो शिकारी के जल में न फसें।

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अगले दिन ऋषि ने तोतों को पढ़ाना शुरू किया उन्होंने तोतों से बोला की बोलो ” बहेलिया ( शिकारी) आयेगा दाना डालेगा जाल बिछाएगा जाल में नही फसना।” तोते भी बोलने लगे “बहेलिया आयेगा दाना डालेगा जाल बिछाएगा जाल में नही फसना।” कुछ ही दिनों में तोतों ने यह वाक्य बहुत ही अच्छे से रट लिया वो जब भी ऋषि को देखते और चिल्लाने लगते ” बहेलिया आयेगा दाना डालेगा जाल बिछाएगा जाल में नही फसना।” ऋषि जब उन तोतों से यह सुनते तो उन्हें बहुत ख़ुशी होती की अब ये तोते शिकारी के जाल में नही फसेंगे। इस प्रकार ऋषि की सारी चिंता खत्म हो गई ।

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एक बार ऋषि को आश्रम से कहीं बाहर जाना था । तो उन्होंने तोतों से कहा याद रखना बहेलिया के जाल में नही फसना । तोते चिल्लाकर बोलने लगे ” बहेलिया आयेगा दाना डालेगा जाल बिछाएगा जाल में नही फसना।” यह सुन ऋषि ख़ुशी ख़ुशी आश्रम से बाहर चले गए।

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कुछ ही देर बाद एक बहेलिया आश्रम तरफ आया उसने दाना डाला और जाल बिछा दिया। तोतों ने दाना देखा तो खा ने गये और जाल में फस गये। बहेलिये ने जाल को उठाया और अपनी घर की और जाने लगा कुछ ही देर में संयोग ऋषि भी उसी रास्ते से आश्रम की और आ रहे थे । जैसे ही जाल में फसे तोतों ने ऋषि को देखा तो वो खुश होकर चिल्ललाने लगे ” बहेलिया आयेगा दाना डालेगा जाल बिछाएगा जाल में नही फसना।” ☺☺ऋषि ने तोतों को जाल में देखा और उनके मुंह से ये वाक्य सुना तो अपना सर पिट लिया। ☺☺

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Moral of story :-   दोस्तों यह कहानी थोड़ी funny है पर यह हमें बहुत ही सुंदर सन्देश देती है कि किसी भी चीज को रटना नही समझना चाहिये। कभी कभी हम भी बहुत सारी बातों को रट लेते है पर समझते नही ज्यादातर छात्र यही करते है । पर आज से आप रटना बन्द करिए और समझना शुरू कीजिए नही तो किसी दिन तोतों की तरह फास जाओगे।☺☺

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