Category Archives: Motivational story

Prushkar/ moral story in hindi for students

नमस्कार दोस्तो आज हम आपके लिए moral story in hindi for students ले कर आये हैं। उम्मीद है ये moral story आपको काफी पसंद आएगी।

 

एक बार एक राजा अपने राज्य के भ्रमण पर निकला । उसने राज्य की गली गली घूमा  व्यापारियों को व्यापार करते देखा माँ को अपने बच्चों को सँभालते हुए देखा किसानों को खेत में कड़ी मेहनत करते हुए देखा सभी खुशहाल नज़र आ रहे थे। 

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ये सब देखकर राजा कुछ गंभीर मुद्रा में सोचने लगा फिर हल्का सा मुस्कुराया जिससे प्रतीत हुआ कि राजा ने कुछ खास योजना बनायी है। फिर राजा ने अपने सैनिकों को कुछ समझाया और कहा  कि आज रात को इस सड़क के बीचों बीच एक भारी पत्थर रख दें।

अगली सुबह राजा ने फिर उसी जगह पर आ कर देखा की जैसा उसने अपने सैनिकों को कहा था उसी के अनुसार कार्य किया गया है। अब राजा छुपकर अपनी प्रजा की प्रतिक्रिया देखने लगा।

 

कुछ देर में चार लोग उस रास्ते पर आते हुए दिखे जैसे ही उन लोगो ने सड़क की बीच पत्थर देखो तो चारो राज को कोस ने लगे की हमारा राजा हमारे लिए कुछ नही करता सड़क पर बन्द है पर राजा ने अभी तक सड़क पर से इस बड़े पत्थर को नही हटवाया। ऐसी बातें करके वो चले गए। राजा चुपचाप छिपकर उनकी बातें सुनता रहा।

इसी प्रकार जो भी बन्दा वहाँ से निकलता राजा को ही कोसता। ऐसा होते होते शाम हो गयी राजा को अपनी प्रजा की ऐसी प्रतिक्रिया देखकर काफी दुःख हुआ । अब उसकी उम्मीद टूट गयी की कोई बन्दा उस पत्थर को हटायेगा। उसी समय राजा को दूर से एक सब्जी वाला आता हुआ दिखाई दिया। वह सब्जी वाला अधेड़ उम्र का लग रहा था। सर पर सब्जी की टोकरी थी । जैसे ही वह सब्जी वाला उस पत्थर के पास आया और रुक कर उस पत्थर को देखने लगा फिर उसने सड़क के चारो तरफ देखा सड़क सुनसान थी कोई बन्दा नही था। फिर कुछ देर उसने कुछ सोचा और अपने सिर की सब्जी की टोकरी को नीचे रखा और पत्थर को सड़क से हटाने लगा। पत्थर काफी भारी था उसे हटाने के लिए उस व्यक्ति को काफी मेहनत करनी पड़ रही थी पर उसने हार नही मानी और जोर लगाया जिससे पत्थर सड़क से हट गया । पर ये क्या पत्थर के नीचे एक हजार सोने के सिक्के थे और एक पत्र था। जिस पर लिखा था कि जो व्यक्ति इस पत्थर को हटायेगा ये एक हजार सोने के सिक्के उसकी मेहनत का इनाम हैं।

 

Moral of story – जो व्यक्ति मेहनत करता मेहनत करता है उसे उसका फल जरूर मिलता है। कोई आपकी problem solve करेगा उसका इतंजार न कर अपनी problem स्वयं हल करें।

Kisan a motivational story in hindi/ किसान ए मोटिवेशनल स्टोरी इन हिंदी

 Kisan a motivational story in hindi/ किसान ए मोटिवेशनल स्टोरी इन हिंदी

 
रामू एक गरीब किसान का बेटा था। उसके परिवार में उसकी एक छोटी बहन , माँ और पिता थे। रामू के पिता ने रामू को कभी भी गरबी का अहसास नही होने दिया। जो कोपड़े , खिलौने , जूते रामू को पसन्द आते रामु के पिता उसको दिला देते । रामु की बहन को अपने परिवार को स्थिति को समझती थी । इसलिए वो हमेशा कम खर्चा करती और पढ़ने में ज्यादा से ज्यादा मेहनत करती ।
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          रामू और उसकी बहन एक ही क्लास में पढ़ते थे। अब वो 10 वी कक्षा में आ गए थे। रामू की बहन ने मेहनत करना जारी रखा। वह रोज खानाँ बनाने और घर का काम करने में माँ की सहायता करती और उसके बाद पढ़ाई करती। तो वहीं रामू सारा समय अपने दोस्तों के साथ आवारा गर्दी करने में गुजार देता। 
 
           अब परीक्षा का समय  आ गया था। इसलिए रामू ने  भी पढ़ाई करने शुरू कर दिया । परीक्षा हुई और आखिर में रिजल्ट का दिन आ गया । 10 वीं की परीक्षा में रामू की बहन ने पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया था। तो वहीं रामू fail हो गया था।
 
            रामु के घर के बाहर उसके बहन को बधाई देने के लिए गांव के आ जा रहे थे । रामू की बहन का साक्षात्कार लेने के लिए पत्रकार  भी आ जा रहे थे। रामू की बहन को सम्मानित करने के लिए आज क्षेत्र के विधायक जी भी आ रहे थे। रामू को आज बहुत दुख हो रहा था कि वो फ़ैल हो गया। उसको समझ नही आ रहा था कि उसकी बहन ने कैसे पुरे प्रदेश में top कर लिया। जबकि 9th में उसकी बहन के नंबर उससे बहुत कम थे।
 
              मंच सज चुका था गांव और क्षेत्र के सभी प्रतिष्ठित व्यक्ति और स्कूल स्टाफ और रामू के माँ और पिताजी वहां मौजूद थे। रामू भी एक सबसे last में सर झुकाए हुए बैठा था। जैसे कोई योद्धा युद्ध क्षेत्र से पीठ दिखाकर भाग कर बच गया हो और बाद में उसको आत्म ग्लानि हो। विधायकजी ने रामू की बहन को सम्मानित किया। और रामू की बहन से उसकी सफलता का राज सबको बताने के लिए बोला।
 
            रामू की बहन ने कहना शुरू किया कि ” मेरी सफलता के पीछे मेरे पिताजी का हाथ है। मेरे पिताजी एक किसान हैं और हम बहुत गरीब हैं। मुझे घर की स्थिति पहले से ही पता थी। इसलिए मैं पढ़ना चाहती थी पर हर बार मेरा परीक्षा परिणाम कक्षा में सबसे कम रहता था। 9th का रिजल्ट भी कुछ वैसा ही था । मैं बहुत दुखी थी और मुझे ऐसा लग रहा था कि मैं जीवन में कुछ नही कर सकती। तभी मेरे पिताजी ने मुझे ऐसे दुखी देखा तो मुझे से दुखी होने की पूरी बात पूछी । मैंने पिताजी को  सारी बात बताई और बोली की पिताजी मैं हर बार असफल हो जाती हूँ। मैं जीवन में कुछ नही कर सकती।
 
         पिताजी ने मेरी पूरी बात सुनी उसके बाद प्यार से मेरे सर पर हाथ फेरा और कहा चलो मैं तुम को आज सफलता का राज बताता हूँ। पिताजी मुझे खेत पर ले गए और बोले बताओ यदि हम आज खेत में गेंहू बो देंगे तो क्या होगा? मैंने बोला पिताजी खेत साफ नही है यदि गेंहू बो भी देंगे तो नही होगा।
 
     पिताजी मुस्कुराये और बोले ठीक है । यदि खेत साफ कर के बो दें गेंहू तो ? मैंने बोला पिताजी खेत साफ कर के भी गेंहू वो देने पर वो नही होगा। उसमे पानी देना पड़ेगा मेहनत कर उसे पकाना पड़ेगा और उसके बाद उसे काट कर निकलना पड़ेगा।
 
     पिताजी मेरी बात सुनकर मुस्कुराये और बोले बेटा ऐसे ही पढ़ाई में भी है पहले खेत को साफ करने के जैसे अपने दिमाग को साफ करो। उसके बाद जैसे हम खेत में बीज डालते है वैसे ही तुम पढ़ाई करो। और जैसे हम समय समय पर पानी देते है वैसे ही तुम समय समय पर अपनी पढ़ी हुए चींजों को पुनः पढ़ते रहें। जैसे हम किसानों को सर्दी , गर्मी सभी को सह कर कठोर मेहनत लगातार करनी होती है । वैसे ही तुम को भी कठोर मेहनत करनी पड़ेगी।
 
     उस दिन मुझे सफल होने का राज पता चला । और जैसा जैसा पिताजी ने बताया था वैसा ही मैंने किया और आज मैंने प्रदेश में 10 वी में प्रथम स्थान प्राप्त किया। अंत मैं अपने साथी दोस्तों से इतना ही कहना चाहती हूँ कि
 
     ” एक दिन में सफलता नही मिलती , पर एक दिन सफलता जरूर मिलती है बस उस दिन तक मेहनत करते रहना।”
 
    ये कहकर रामू की बहन ने अपनी बात खत्म कि चारो और तालियों की गड़गड़ाहट गूँज उठी रामू के माता पिता की आँखों से आंसू वर्ष रहे थे और रामू के उदास चेहरे पर एक मुस्कुराहट छा गयी थी क्योंकि आज उसे अपनी बहन की सफलता का राज जो पता चल गया था।
 
 
 
 
 
 

Apni galtiyon se sikhen story in hindi

Apni galtiyon se sikhen story in hindi


थोमस एडिसन ने प्रकाश बल्ब के लिए फिलामेंट की खोज में दो हजार विभिन्न सामग्रियों का उपयोग किया। पर इसका संतोषजनक कोई परिणाम नही आया , तो उनके सहायक ने शिकायत की, “हमारा सारा काम व्यर्थ है। हमने कुछ नहीं सीखा है। ”

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एडिसन ने बहुत आत्मविश्वास से जवाब दिया, “ओह, हम बहुत आगे आ चुके हैं और हमने बहुत कुछ सीखा है। हम जानते हैं कि दो हजार तत्व हैं जिनका उपयोग हम एक अच्छा प्रकाश बल्ब बनाने के लिए नहीं कर सकते हैं।

जब हम असफल होते है तब भी हम बहुत कुछ सिख सकते हैं । उस सिख के उपयोग कर हम सफलता प्राप्त कर सकते हैं। ऐसा कोई व्यक्ति नही जिसने कभी कोई गलती न की हो , गलती करना स्वाभाविक है पर समझदार लोग वो होते हैं जो इन गलतियों से प्रेरणा लेते है।

किसी ने कहा है ” गलती करना बुरा नही होता , गलती से न सीखना बुरा होता है।”

Moral of story :- गलती करने से न डरें । लेकिन गलतियों से सबक जरूर लें।


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Best hindi stories

     Best hindi stories 1

 

दोस्तों आज हम आपके लिए दो best hindi stories लेकर आये हैं। उम्मीद है आपको ये hindi stories पसन्द आयेगीं।

एक नमक बेचने वाला हर दिन अपने गधे पर नमक की थैली को बाजार तक ले जाता था।

रास्ते में उन्हें एक नाला पार करना था। एक दिन गधा अचानक धारा में गिर गया और नमक की थैली भी पानी में गिर गई। नमक पानी में घुल गया और इसलिए बैग ले जाने के लिए बहुत हल्का हो गया। गधा खुश था।

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फिर गधे ने हर दिन एक ही चाल चलना शुरू कर दिया।

नमक बेचने वाले को चाल समझ में आ गई और उसने उसे सबक सिखाने का फैसला किया। अगले दिन उसने गधे पर एक कपास की थैली लाद दी।

इसने फिर से वही चाल खेली जिससे उम्मीद की जा रही है कि कॉटन बैग अभी भी हल्का हो जाएगा।

लेकिन भीगे हुए कॉटन को कैरी करना भारी पड़ गया और गधे को अधिक वजन  उठाना पड़ा। इसने एक सबक सीखा। उस दिन के बाद गधे ने यह चाल नहीं चली, और विक्रेता खुश था।

Moral of story :- किस्मत हमेशा साथ नही देती।

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 चार कॉलेज स्टूडेंट्स

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एक रात चार कॉलेज के छात्र देर रात पार्टी कर रहे थे और अगले दिन के लिए निर्धारित किए गए टेस्ट के लिए अध्ययन नहीं किया था। सुबह उन्होंने एक योजना के बारे में सोचा।
उन्होंने खुद को तेल और गंदगी से गंदा कर दिया।
फिर वे डीन के पास गए और कहा कि वे कल रात एक शादी में गए थे और रास्ते में उनकी कार का टायर फट गया और उन्हें कार को पीछे की तरफ धकेलना पड़ा। इसलिए वे परीक्षा देने की स्थिति में नहीं थे।
डीन ने एक मिनट के लिए सोचा और कहा कि वे 3 दिनों के बाद फिर से परीक्षण कर सकते हैं। उन्होंने उसे धन्यवाद दिया और कहा कि वे उस समय तक तैयार हो जाएंगे।
तीसरे दिन, वे डीन के सामने उपस्थित हुए। डीन ने कहा कि चूंकि यह एक विशेष स्थिति परीक्षण था, इसलिए इन चारों को परीक्षण के लिए अलग-अलग कक्षाओं में बैठने की आवश्यकता थी। वे सभी सहमत थे क्योंकि उन्होंने पिछले 3 दिनों में अच्छी तैयारी की थी।
टेस्ट में कुल 100 अंकों के साथ केवल 2 प्रश्न शामिल थे:
1) आपका नाम? __________ (1 अंक)
2) कौन सा टायर फट गया? __________ (99 अंक)
विकल्प – (ए) फ्रंट लेफ्ट (b) फ्रंट राइट (c) बैक लेफ्ट (d) बैक राइट

Moral of story :- झूट हमेशा पकड़ा जाता है।

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पारस पत्थर ….Story in hindi

             पारस पत्थर ….Story in hindi

समय एक छोटा सा शब्द है पर इस पर हमारी पूरी सफलता निर्भर करती है। यदि सही वक्त पर सही फैसला लिया जावे तो यह सफलता प्राप्त करने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ज्यादातर लोग समय के महत्व को नही समझते और उसे बर्वाद करते रहते है। पर एक बाद याद रखनी चाहिए की यदि आप आज समय को बर्वाद करते हो तो आगे चलकर यही समय आपको बर्वाद कर देगा।

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     बहुत समय एक आश्रम था। जिसमे पढ़ने के लिए दूर दूर से छात्र आते थे। एक बार एक नया छात्र आश्रम में पढ़ने के लिए आया उसका नाम था रामू । रामू पढ़ने में बहुत होशियार था । पर उसमे एक बहुत बड़ी बुराई थी की वह बहुत आलसी था। हर काम में आलसी करता था। हर कार्य को टालता रहता जब तक वह बहुत जरूरी नही हो जाता।

       आश्रम के मुख्य आचार्य ने जब ऐसा देखा तो उन्हें लगा की यदि रामू की यह आदत नही सुधारी गयी तो उसकी पूरी जिंदगी बर्वाद हो जायेगी। वह ऐसे ही अपना समय बर्वाद करता रहेगा ।

     आचार्य ने रामू को सुधारने के लिए एक युक्ति सोची । एक दिन आचार्य ने रामू को बुलाया और उससे कहा बेटा ” आज मैं आश्रम से बाहर जा रहा हूँ। मैं तुम्हें पारस पत्थर देकर जा रहा हूँ। तुम चाहो जितना लोहे से इसको छुआ कर सोना बना सकते हो। मैं कल शाम तक लौट आऊँगा। अतः कल शाम तक का तुम्हारे पास समय है।”
 
     ऐसा कहकर आचार्य ने एक कपड़े में बंधा पत्थर रामू को दे दिया और वो आश्रम से बाहर चले गए। रामू पत्थर को पाकर बहुत खुश हुआ। अब वह सोचने लगा कि ” अब में बहुत सारा लोहा खरीदूँगा और उसे सोना बना दूँगा। मेरे पास बहुत सारा धन होगा बहुत सारे नौकर चाकर होंगे।”

        रामु ऐसा सोच सोच कर बहुत खुश हो रहा था। फिर उसने सोचा अभी तो कल तक का समय है। मैं कल सुबह ही जाकर लोहा खरीदूँगा और सोना बना लूँगा। ऐसे सोचते सोचे रामू ने अपना पहला दिन यूँही गुजार दिया।

     दूसरे दिन रामु सुबह जल्दी उठा और सोचने लगा आज तो कुछ भी हो बाजार से लोहा लाकर उसे सोना बनाना है। पर अभी तो काफी समय है दोपहर को बाजार जाऊँगा। जैसे ही दोपहर होता है रामू खाना खाकर बाजार जाने के लिए तैयार होता । उसके बाद रामू फिर सोचने लगता है ” अभी तो शाम तक का समय है और अभी धूप भी काफी ज्यादा है और अभी अभी खाना भी खाया है थोड़ा सो लेता हूँ उसके बाद पक्का बाजार जाकर लोहा लाकर उसे सोना बना लूँगा।” ऐसा सोचकर रामू सो जाता है और जब उसकी नींद खुलती है तो वो घबरा जाता है ये क्या शाम हो गई। वह पत्थर लेकर बाजार की और दौड़ता है। पर जैसे ही आश्रम से निकलता है सामने आचार्य खड़े हुए दिखाई देते हैं। आचार्य रामू से बोलते हैं ” बेटा मेरा पारस पत्थर मुझे बापस करो।”

       ऐसा सुनकर रामू रोते हुए बोला “गुरुदेव मुझ से बहुत बड़ी गलती हो गई मेरे पास पारस पत्थर था पर मैं ने समय बर्वाद कर दिया अपने आलसीपन के कारण।”

       आचार्य ने कहा ” बेटा ये कोई पारस पत्थर नही है यह एक साधारण पत्थर है । पर जो तुम समय बर्वाद कर रहे हो वो जरूर पारस पत्थर है। ये वो समय है जिसका उपयोग कर तुम अपनी और अपने परिवार की जिंदगी बदल सकते हो। तुम्हें इस बात का एहसास दिलाने के लिए ऐसा करना पड़ा।”
रामू ने आचार्य से हाथ जोड़कर कहा ” गुरुदेव आज मुझे अपनी गलती का अहसास हो गया आज से मैं कभी भी समय को यूँ बर्वाद नही करूँगा।”

Moral of story :- समय ही पारस पत्थर है इसका सदुपयोग कर आप अपनी जिंदगी को सोना बना सकते हैं।

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Story in hindi दौड़

                Story in hindi दौड़

आज के आधुनिक युग में हमे सिखाया जाता है कि जीतना ही सबसे महत्वपूर्ण चाहे वो जीत कैसे ही प्राप्त हो ये मायने नही रखता। क्या सच में जीवन में जीतना ही सफलता की परिभाषा है? क्या बाकि चीजें कोई मतलब नही रखतीं? इन सवाल का जवाब देती है आज की Story in hindi दौड़।
       आज स्कूल मैं दौड़ प्रतियोगिता का आयोजन होना है । सभी छात्रों में काफी उत्साह है। हर एक इस दौड़ प्रतियोगिता को जीतना चाहता है । और चाहे भी क्यों न जो इस  प्रतियोगिता को जीतेगा उसको राज्य के cm ट्राफी देकर सम्मानित करेंगे साथ ही उसकी पूरी पढ़ाई भी स्कूल में फ्री में होगी।

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      स्कूल के दो होनहार छात्र रवि और राधे के बीच ही कड़ी टक्कर मानी जा रही है। दोनों ने इस प्रतियोगिता के लिए बहुत कड़ी मेहनत की है इसके साथ दिलचस्प बात यह है कि इन दोनों की आपस में बिल्कुल नही बनती दोनों के बीच दुश्मनी पुरे स्कूल मे सबको पता है। दोनों एक दूसरे को किसी भी हाल में हराना चाहते हैं।

     आखिर प्रतियोगिता शुरू होने का समय आ गया स्कूल के चीफ गेस्ट राज्य के CM भी प्रतियोगिता स्थल पर मौजूद हैं। हरी झंडी दिखाने के साथ ही सभी प्रतिभागियों ने दौड़ना प्रारम्भ किया जैसे की पहले से ही उम्मीद थी रवि और श्याम श्याम सबसे आगे दौड़ रहे थे ।

       कभी श्याम , रवि  को पीछे छोड़ आगे हो जाता तो कभी रवि आगे हो जाता दोनों के बीच कड़ा मुकाबला हो रहा था। रवि ने और जोश के साथ दौड़ना शुरू किया और वह श्याम को पीछे छोड़ काफी आगे निकल गया वहाँ उपस्थित सभी लोगो को लगने लगा लगा की अब रवि पक्का जीत जायेगा । और सभी जोर जोर से रवि का नाम लेकर चिल्लाने लगे। रवि भी बहुत तेजी से winning लाइन की तरफ दौड़ रहा था और उसके काफी पीछे श्याम था। पर ये क्या रवि winning line से कुछ दूर अचानक खड़ा हो गया। सभी लोग हैरान हो गये और श्याम देखते ही देखते winning लाइन  को पार कर गया ।

        श्याम जीत गया , वहाँ उपस्थित सभी लोग हैरान हो रहे थे और रवि के चेहरे पर एक खूबसूरत मुस्कान थी।

        श्याम को ट्राफी दी गई साथ ही उसकी स्कूल में पढ़ाई भी फ्री कर दी गई। राज्य के CM ने श्याम को जीत की बधाई भी दी । इसके  बाद CM ने रवि को स्टेज पर बुलाया और रवि से पूछा ” बेटा तुम जीत सकते थे पर तुमने दौड़ना बन्द क्यों कर दिया? बस यही प्रश्न का उत्तर जानने के लिए में बहुत उत्सुक हूँ।

         रवि ने उत्तर दिया ” सर कल शाम में market गया तो मैंने श्याम को वहाँ सब्जी बैंचते हुए देखा बाद में पता चला की श्याम के पिताजी की सब्जी की दुकान है । और वो बहुत गरीब है जैसे तैसे कर के वो श्याम को इतने अच्छे स्कूल में पढ़ा रहे हैं । और उनको उम्मीद थी की श्याम इस प्रतियोगिता को जीत लेगा और उसकी पढ़ाई फ्री हो जायेगी। इसके लिए श्याम ने भी दिन रात प्रैक्टिस की ।” रवि फिर मुस्कुराया और बोला ” सर श्याम को मुझे से ज्यादा इस जीत की जरूरत थी इसलिए मैं हार गया।”

         CM , श्याम , सभी टीचर और सभी लोगो के आँखों से आँसू आ रहे थे। रवि के चेहरे पर अब भी विजयी मुस्कान थी। आज रवि हार कर भी बहुत कुछ जीत गया था।
               
 
Moral of story :-   कभी कभी हार जीत से ज्यादा ख़ुशी देती है।

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Arjun ….story in hindi for kids

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महाभारत हिंदी का महान ग्रन्थ है । इससे बहुत ही अच्छी शिक्षा प्राप्त होती है जो की जीवन को सफल बनाने में बहुत मदद करती है। Arjun ….story in hindi for kids
यह story बहुत ही अच्छा सन्देश देती है । जिसको हम अपने जीवन में उतार कर सफलता प्राप्त कर सकते हैं।
         अर्जुन द्रोणाचार्य का सबसे प्रिय शिष्य था। एक बार अर्जुन को छोड़कर सभी पांडव और कौरव आचार्य द्रोणा के पास गए और बोले ” गुरुदेव आप अर्जुन को हम सबसे ज्यादा प्यार करते हो इसलिए उससे ज्यादा सिखाते हो और हम सभी को कम आप हम सबके साथ भेदभाव करते हो।”Arjun ….story in hindi for kids

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           द्रोणाचार्य ने कहा ” ऐसा कुछ नही है मैं सभी को समान ज्ञान देता हूँ अंतर केवल इतना है कि अर्जुन को सीखने की इच्छा तुम लोगो से ज्यादा है और वह इसके लिए मेहनत भी करता है इसलिए वो तुम सभी लोगों से जल्दी विद्यया सिख रहा है। फिर भी तुम लोगो को लगता है कि मैं कोई भेदभाव कर रहा हूँ तो कल मैं सिद्ध कर दूँगा की।अर्जुन अपनी बुद्धिमानी और मेहनत से सीखता है।”Arjun ….story in hindi for kids
         
           यह कह कर द्रोणाचार्य ने कहा कल हम सब नदी नहाने चलेंगे वही अर्जुन की परीक्षा ली जायेगी। सभी ने यह बात स्वीकार कर ली। दूसरे दिन प्रातः काल द्रोणाचार्य ने सभी को बुलाया अर्जुन भी साथ में था और सभी से कहा ” आज तुम सब मेरे साथ नदी में स्नान करने के लिए चलो।”  अर्जुन समेत सभी द्रोणाचार्य के साथ नदी के लिए चल दिए रस्ते में एक पीपल का पेड़ था। वहाँ पर जाकर द्रोणाचार्य ने अर्जुन से कहा ” अर्जुन मैं अपने वस्त्र आश्रम में भूल आया तुम शीघ्र जाकर मेरे वस्त्र लेकर आओ।”Arjun ….story in hindi for kids

          अर्जुन , अपने गुरु की आज्ञा पाकर आश्रम की और चला जाता है। अब द्रोणाचार्य बाकि सभी से बोलते है “आज मैं तुम सभी को एक नई विद्या सिखाऊंगा जिससे तुम केवल एक तीर से उस पीपल सभी पत्तों में छेद कर सकते हो। द्रोणाचार्य ने सभी को एक मन्त्र बताया फिर उन्होंने अपने धनुष से एक तीर पीपल के पेड़ में मारा तो पेड़ के सभी पत्ते में एक -एक छेद हो गया। इसके बाद द्रोणाचार्य ने उस मन्त्र को वहीँ जमीन पर लिख दिया और सभी को लेकर नदी की और चल दिए।Arjun ….story in hindi for kids

        अब यहाँ अर्जुन वस्त्र लेकर नदी की और लौट रहा था तो उसका ध्यान पीपल के पेड़ पर गया। उसने देखा कि पीपल के हर एक पत्ते पर एक छेद है जोकि कुछ देर पहले नही था। अर्जुन ने सोचा जरूर गुरुदेव ने आज नई विद्या सिखाई होगी। मैं उसको कैसे सीखू कैसे सीखू इस प्रकार अर्जुन उस पेड़ के चारों और गौर से देखने लगा । अचानक उसकी नजर जमीन पर लिखे मन्त्र पर पड़ी। अर्जुन ने पूरी श्रद्धा से उस मन्त्र का उच्चारण कर कर अपने धनुष से पीपल के पेड़ पर तीर चला दिया। ये क्या अभी पत्तों पर एक छेद था अब सभी पत्तों पर दो छेद हो गए। यह देखकर अर्जुन बहुत खुश हुआ और वस्त्र लेकर नदी पर पहुँच गया।story in hindi for kids

        सभी ने स्नान किये फिर द्रोणाचार्य सभी को पेड़ के पास ले गए । पेड़ को देखकर सब को बहुत आश्चर्य हुआ की पत्तियों पर दूसरा छेद कैसे हुआ। द्रोणाचार्य ने सभी से पूछा कि ” यह किसने किया।”story in hindi for 
   
        तभी अर्जुन डरते हुए आगे आया और बोला ” गुरुदेव यह अपराध मैंने किया है मुझे लगा कि अपने यह विद्या सबको सीखा दी और अब मैं आप से यह विद्या सीखूंगा तो आपका समय नष्ट होगा इसलिए गुरुदेव मैंने यहाँ जमीन पर लिखे आपके मंत्र को बिना आपकी आज्ञा के उपयोग किया आप मुझे क्षमा कर दें।”story in hindi for 

     द्रोणाचार्य की आँखों में आँसू या गये और उन्होंने अर्जुन को गले लगा लिया और बाकि सब से बोले ” इसलिए अर्जुन मेरा प्रिय शिष्य है।” अब सभी को समझ आ गया था कि अर्जुन विधा सीखने के लिए उन सब से ज्यादा मेहनत करता है।story in hindi for 

Moral of story -:  हम ज्यादातर बहाने  बनाते रहते हैं कि मैं इस कारण पढ़ाई नही कर पता , मेरे पास समय नही हैं , जिस दिन यह टॉपिक पढ़ाया उस दिन तो मैं आया ही नही था आदि । यदि सफलता पाना है तो नया सीखने की इच्छा और मेहनत अर्जुन की तरह करनी होगी। आज से बहाने बनाना छोड़ दो।story in hindi for kids


     

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सफलता का रहस्य / Secret of Success in hindi

सफलता का रहस्य / Secret of Success in hindi

 एक बार आश्रम में शिक्षा प्राप्त करने आये एक शिष्य ने अपने गुरु से पूछा ” गुरुदेव सफलता का रहस्य क्या है? कैसे कोई भी व्यक्ति अपने जीवन में सफलता प्राप्त करता है । गुरुदेव सभी व्यक्ति जीवन में सफल होना चाहते हैं पर

कुछ ही लोग अपने जीवन में जो सफलता प्राप्त करना चाहते हैं वो प्राप्त कर पाते है पर अधिकांश लोग असफल हो जाते है। गुरुदेव इस का क्या कारण है कृपया हमें बताएं। गुरुदेव मुशकुराये और अपने शिष्य से बोले बेटा कल रात को में इस सवाल का जवाब दूँगा।

सफलता का रहस्य / Secret of Success in hindi

              दूसरे दिन जब सुबह हुई तो गुरुदेव ने सभी शिष्यों को कार्य देना प्रारम्भ किया कि आज कौन शिष्य कौन सा कार्य करेगा । जिस शिष्य ने कल “,सफलता का रहस्य पूछा था” उससे गुरुदेव ने कहा कि वत्स आज तुम आश्रम के लिए लकड़ी काट कर लाओगे। शिष्य ने बोला ” जैसी आपकी आज्ञा गुरुदेव ।”

    इस प्रकार वह शिष्य कुल्हाड़ी लेकर लकड़ी काटने के लिए चल पड़ा जंगल में उसे  एक पेड़ दिखाई दिया जिस पर काफी सारी लकड़ी थी जिनका उपयोग आश्रम में किया जा सकता था । तो वह उस पेड़ पर चढ़ गया और लकड़ी काटने लगा काटते काटते वह पेड़ के काफी ऊंचाई पर जा चूका था। उसने देखा की वह जिस डाल पर बैठा उसी डाल पर एक साँप उसकी और चला आ रहा है। यह देख वह काफी डर गया और उसने पेड़ के काफी ऊँचाई से जमीन पर छलाँग लगा दी। वह जमीन पर आकर गिरा उसको काफी चोट आई पर वह फिर भी खुश था क्योंकि उसकी जान बच गई थी।

सफलता का रहस्य / Secret of Success in hindi

     जैसे तैसे कर कर वह आश्रम पहुँच रात हो चुकी थी जैसे ही उसने आश्रम में प्रेवेश किया उसे सामने गुरुदेव मुसुकुराते हुए दिखाई दिए। उसे समझ नही आ रहा था कि उसको इतनी चोट लगी है फिर भी गुरुदेव मुस्कुरा क्यों रहे हैं। जब उससे और न रहा गया तो उसने कहा ” गुरुदेव आप मेरी ऐसी हालत देखकर मुस्कुरा क्यों रहे हैं।”

      गुरुदेव ने कहा ” बेटा कल तुमने मुझे से एक सवाल पूछा था कि सफलता का क्या रहस्य है , तो बेटा आज जो तुमने किया वही सफलता का रहस्य है जब तुम ऊँचाई पर थे और तुमने सामने से साँप को आते देख इतनी ऊंचाई से छलांग लगा दी क्योंकि तुम्हे अपनी जिंदगी बहुत प्यारी है और उसे बचाने के लिए तुम कुछ भी कर सकते हो जिस दिन तुम जिस कार्य में सफल होना है उसे अपनी जिंदगी जितना प्यार करने लगोगे उस दिन तुम्हें सफल होने से कोई नही रोक सकता। तुमने दूसरा सवाल पूछा था कि अधिकांश लोग असफल क्यों हो जाते है उसका उत्तर भी यही है क्योंकी वो लोग सफल होना चाहते हैं पर उनके लिए सफलता अपनी जिंदगी जितनी प्यारी नही है वो उससे पाने के लिए उतना प्रयास नही करते जितना कभी जिंदगी मुशीबत में पड़ने पर उसे बचाने के लिए करेंगे अर्थात वो अपनी पूरी लगन से उस कार्य को नही करते इसलिए वो असफल हो जाते हैं। और एक सफल व्यक्ति सफलता प्राप्त करने के लिए अपना पूरा ध्यान और पूरी शक्ति उस कार्य को करने में लगा देता है अतैव उसे सफलता मिलना निश्चित है। और हाँ आज जो साँप पेड़ पर आया था उसे मैंने ही वहाँ छोड़ा था ताकि तुम्हरे सवाल का उत्तर तुमको सही प्रकार से समझा सकूँ।”

   शिष्य , गुरुदेव के चरणों में गिर गया आज उसे सफलता का असली रहस्य पता चल गया था । गुरुदेव के चेहरे पर हल्की मुस्कान थी और शिष्य के चेहरे पर उत्तर से सन्तुष्ट होने के भाव दिखाई दे रहे थे।
                           
       
 
Moral of story :-

” सफलता को जब आप उतना ही जरूरी समझने लगो जितनी की अपनी जिंदगी को समझते हो तो आपको सफल होने से क्यों नही रोक सकता।”
             
                                  Write by @gaurav rajput

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बहुत समय पहले एक राज्य था । वहाँ पर कोई भी राजा नही था जिससे राज्य में बहुत अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हो गई राज्य के सभी लोग परेशान थे । क्योंकि राज्य में राजा न होने के कोई भी कानून व्यवस्था न थी । इस समस्या को सुलझाने के लिए राज्य के लोगो ने एक सभा की और उसमें निर्णय लिया गया कि राज्य को यदि खुशहाल बनाना है और उसका विकाश करना है तो राज्य में एक राजा होना बहुत आवश्यक है । राज्य के राजा को चुनने के लिए एक प्रतियोगिता का आयोजन किया जायेगा और जो उस प्रतियोगिता को जीतेगा उसे राज्य का राजा घोषित कर दिया जावेगा। सर्वसम्मति से ये प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया कि अगले माह की सरद पूर्णिमा के दिन प्रतियोगिता का आयोजन होगा । प्रतियोगिता कैसी होगी उसी दिन निर्धारित करेंगे । इस प्रकार सभा खत्म हुए और सभी ख़ुशी ख़ुशी अपने घर की और चल दिए सब के मन में बहुत उत्साह था हर कोई राजा बनाना चाहता था।

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                सरद पूर्णिमा के दिन सभी लोग एक जगह एकात्रित हो जाते हैं । तभी एक बुजुर्ग व्यक्ति सभी से बोलता है कि आप लोगो को यह पहाड़ दिख रहा है जो भी बिना रुके इस पहाड़ की सबसे ऊँची चोटी पर बिना रुके सबसे पहले पहुँच जायेगा उसे राज्य का राजा घोषित कर दिया जावेगा । जैसे ही सबने ये बात सुनी सब पहाड़ की और दौड़ पड़े और उस पर चढ़ने लगे । पहाड़ बहुत ही ऊँचा था और उस पर चढ़ना बड़ा ही कठिन था क्योंकि पत्थर के फिसलने से मौत की भी आशंका यही खैर फिर भी सभी पहाड़ पर चढ़ने लगे सभी के मन में एक ही तमन्ना थी की वो ही राजा बनें । पर ये क्या कुछ ही समय में सबकी हिम्मत जवाब देने लगी । कुछ लोगो की चोटी पर पहुँचना असम्भव है । और उन्होंने चढ़ना बन्द कर दिया और जो उनसे थोड़ा ज्यादा ऊपर थे उनको भी चिल्लाकर बोलने लगे । अरे भाई लौट आओ चोटी बहुत ऊँची है और पत्थर भी फिसल रहें है। ऊपर जाना असम्भव है अपनी जान की सलामती चाहते हो तो लौट आयो । जब ऊपर वालों ने सुना तो उन्हें भी लगने लगा कि सचमुच चोटी पर जाना कठिन है । और वो भी ऊपर चढ़ने का इरादा छोड़ नीचे उतरने लगे सभी मन से हार गए थे। तभी एक व्यक्ति बोलता है देखो वो कौन है पहाड़ पर जो अभी भी चढ़ने की कोशिश कर रहा है। सभी ने पहाड़ की और देखा तो उन्हें दिखा की एक बहुत ही दुबला पतला व्यक्ति अपनी ही धुन में पहाड़ पर चढ़ा जा रहा है । जबकि सब हर मान कर नीचे आ गए । अब नीचे के सभी व्यक्ति जोर जोर से चिल्ललाने लगे अरे पागल नीचे लौट आया । जब हम से नही हो पाया तो तुझ से कैसे होगा। वह चढ़ने वाला व्यक्ति फिर भी नही रूका तो भीड़ नीचे वाली भीड़ ने चिल्लाकर बोला अगर और ऊपर जायेगा तो मर जायेगा हमारी बात मान और नीचे आ जा आज तक कोई भी उस ऊपर वाली चोटी पर नही पहुँच पाया लौट आया अब भी मौका है लौट आ। पर ये क्या उसने और भी तेज पहाड़ पर चढ़ना शुरू कर दिया और देखते ही देखते वह पहाड़ की उस छोटी पर पहुँच गया। सभी और ख़ुशी छा गई और उस चढ़ने वाले व्यक्ति की जय जयकार होने लगी ।  तभी एक बुजुर्ग ने कहा देखो वह व्यक्ति कितना साहसी और निडर है सबने उसे इतना रोकने की कोशिश की फिर भी वह नही रुक कितना महान है वो व्यक्ति। तभी पीछे से एक आवाज आती है कि कोई महान वाहन नही है वो तो एक बहरा है जो सुन ही नही सकता ।☺😊😊
Moral of story :-. यदि आपको कोई बड़ा और महान कार्य करना हो तो बहरा बन जाओ किसी की मत सुनो । एक मिनट सोचिये जो व्यक्ति चोटी पर पहुँचा यदि वो सुन सकता तो क्या चोटी पर पहुँच पाता नही न । वैसे ही हम जब तक अपने आस पास वालों की बातों पर ध्यान देंगे  तो life में ज्यादा सफल नही हो सकते । यदि सच में लाइफ में कुछ बड़ा करना है। तो आज से ही सुनना बन्द कर दीजिये।
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धक्का – a moral story in hindi / mora story

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         धक्का – a moral story in hindi

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बहुत समय पहले एक राज्य में एक राजा राज्य करता था। वह बहुत सनकी था । वह अपने अजीबो गरीब हरकतों के कारण काफी कुप्रसिद्ध था । एक बार उसने अपने राज्य में एक बहुत बड़े कार्यक्रम का आयोजन किया जिसमें उसने सभी राज्य के लोगो को आमंत्रित किया । कार्यक्रम बढ़िया चल ही रहा था की उसको एक विचार आया और
उसने घोषणा कर दी की यहाँ उपस्थित कोई भी व्यक्ति यदि उसके बनवाये तालाब को पार कर लेगा तो वह उसे अपना आधा राज्य दे देगा साथ ही अपनी एक लोती पुत्री से उसका विवाह भी कर देगा । घोषणा सुनकर सारी भीड़ तालाब की और भागी पर । तालाब देखकर सब को पसीना आ गया ।
क्योंकि सभी ने देखा की तालाब नरभक्षी मगरमच्छो से भरा पड़ा था । उस भीड़ में से किसी की हिम्मत भी नही हुई की तालाब को पार करना तो दूर उसके पास भी जा सके । राजा ने देखा की कोई भी तालाब पार करने के लिए तैयार नही तो उसने जोर से चिल्लाकर कहा धिक्कार !है धिक्कार! है 
सभी को क्या मेरे राज्य में कोई ऐसा वीर नही जो इस तुच्छ तालाब को पार कर सके । राजा ऐसी जोशीली भाषा बोल ही रहा था कि एक युवक ने  तालाब में छलांग लगा दी सभी चिल्लाने लगे की इसे बचाओ नही तो ये आज पक्का मर जायेगा , आज ये महान बनने के कारण मारा जायेगा बचाओ इसे बचाओ कोई पर ये क्या युवक ने तालाब में तैरना प्रारम्भ कर दिया ।
और वह तालाब के दूसरी तेजी से बढ़ने लगा । कुछ लोग चिल्लाने लगे अरे ये तो सचमुच बहुत साहसी है । ये पक्का इस तालाब को पार कर लेगा । युवक भी मगरमच्छों से खुद को बचाते हुए तेजी से तालाब को पार कर लेता है। चरों तरफ उस युवक की जय जयकार होने लगती है । राजा बहुत खुश होता है ।
राजा युवक की पीठ थपथपा कर बोलता है ” बहुत खूब तुम बहुत साहसी और वीर हो मैं अपना आधा राज्य तुमको देता हूं साथ ही राजकुमारी का विवाह भी तुम्हारे साथ करता हूं।”
युवक बोलता है -: ” भाड़ में जाओ तुम , भाड़ में जाये तुम्हारा राज्य और भाड़ में जाये राजकुमारी पहले ये बताओ धक्का किसने मारा मुझे।” ☺☺☺☺
 
Moral of story :-  हमारे अंदर बहुत potential  होता है । पर हम डर के कारण उसका उपयोग नही करते । जैसे story में युवक के अंदर वो क्षमता थी पर वह उसका उपयोग नही कर रहा था। पर जैसे ही किसी ने उसे धक्का दिया उसने खूंखार मगरमच्छो से भरे तालाब को पार कर लिया । आपके के अंदर भी काफी प्रतिभा है क्षमताएं है बस जरुरत है तो बस एक धक्के की ।
 
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