Story in hindi दौड़

                Story in hindi दौड़

आज के आधुनिक युग में हमे सिखाया जाता है कि जीतना ही सबसे महत्वपूर्ण चाहे वो जीत कैसे ही प्राप्त हो ये मायने नही रखता। क्या सच में जीवन में जीतना ही सफलता की परिभाषा है? क्या बाकि चीजें कोई मतलब नही रखतीं? इन सवाल का जवाब देती है आज की Story in hindi दौड़।
       आज स्कूल मैं दौड़ प्रतियोगिता का आयोजन होना है । सभी छात्रों में काफी उत्साह है। हर एक इस दौड़ प्रतियोगिता को जीतना चाहता है । और चाहे भी क्यों न जो इस  प्रतियोगिता को जीतेगा उसको राज्य के cm ट्राफी देकर सम्मानित करेंगे साथ ही उसकी पूरी पढ़ाई भी स्कूल में फ्री में होगी।

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      स्कूल के दो होनहार छात्र रवि और राधे के बीच ही कड़ी टक्कर मानी जा रही है। दोनों ने इस प्रतियोगिता के लिए बहुत कड़ी मेहनत की है इसके साथ दिलचस्प बात यह है कि इन दोनों की आपस में बिल्कुल नही बनती दोनों के बीच दुश्मनी पुरे स्कूल मे सबको पता है। दोनों एक दूसरे को किसी भी हाल में हराना चाहते हैं।

     आखिर प्रतियोगिता शुरू होने का समय आ गया स्कूल के चीफ गेस्ट राज्य के CM भी प्रतियोगिता स्थल पर मौजूद हैं। हरी झंडी दिखाने के साथ ही सभी प्रतिभागियों ने दौड़ना प्रारम्भ किया जैसे की पहले से ही उम्मीद थी रवि और श्याम श्याम सबसे आगे दौड़ रहे थे ।

       कभी श्याम , रवि  को पीछे छोड़ आगे हो जाता तो कभी रवि आगे हो जाता दोनों के बीच कड़ा मुकाबला हो रहा था। रवि ने और जोश के साथ दौड़ना शुरू किया और वह श्याम को पीछे छोड़ काफी आगे निकल गया वहाँ उपस्थित सभी लोगो को लगने लगा लगा की अब रवि पक्का जीत जायेगा । और सभी जोर जोर से रवि का नाम लेकर चिल्लाने लगे। रवि भी बहुत तेजी से winning लाइन की तरफ दौड़ रहा था और उसके काफी पीछे श्याम था। पर ये क्या रवि winning line से कुछ दूर अचानक खड़ा हो गया। सभी लोग हैरान हो गये और श्याम देखते ही देखते winning लाइन  को पार कर गया ।

        श्याम जीत गया , वहाँ उपस्थित सभी लोग हैरान हो रहे थे और रवि के चेहरे पर एक खूबसूरत मुस्कान थी।

        श्याम को ट्राफी दी गई साथ ही उसकी स्कूल में पढ़ाई भी फ्री कर दी गई। राज्य के CM ने श्याम को जीत की बधाई भी दी । इसके  बाद CM ने रवि को स्टेज पर बुलाया और रवि से पूछा ” बेटा तुम जीत सकते थे पर तुमने दौड़ना बन्द क्यों कर दिया? बस यही प्रश्न का उत्तर जानने के लिए में बहुत उत्सुक हूँ।

         रवि ने उत्तर दिया ” सर कल शाम में market गया तो मैंने श्याम को वहाँ सब्जी बैंचते हुए देखा बाद में पता चला की श्याम के पिताजी की सब्जी की दुकान है । और वो बहुत गरीब है जैसे तैसे कर के वो श्याम को इतने अच्छे स्कूल में पढ़ा रहे हैं । और उनको उम्मीद थी की श्याम इस प्रतियोगिता को जीत लेगा और उसकी पढ़ाई फ्री हो जायेगी। इसके लिए श्याम ने भी दिन रात प्रैक्टिस की ।” रवि फिर मुस्कुराया और बोला ” सर श्याम को मुझे से ज्यादा इस जीत की जरूरत थी इसलिए मैं हार गया।”

         CM , श्याम , सभी टीचर और सभी लोगो के आँखों से आँसू आ रहे थे। रवि के चेहरे पर अब भी विजयी मुस्कान थी। आज रवि हार कर भी बहुत कुछ जीत गया था।
               
 
Moral of story :-   कभी कभी हार जीत से ज्यादा ख़ुशी देती है।

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